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बेहतर जिओ !

विचार

अंग्रेज़ी बहुत आसान है

दिनांक : 2018-09-08
लेखक : कैलाश चन्द्र शर्मा

अंग्रेज़ी भाषा को लेकर हमारे मन में अनेक भ्रम व्याप्त हैं। दुर्भाग्य से हमें यह बार-बार समझाया गया है कि अंग्रेज़ी एक कठिन भाषा है। ऐसा कहा जाता है कि जब एक झूठ बार-बार बोला जाता है तो वह सच के जैसा लगता है। सच्चाई यह है कि अंग्रेज़ी बहुत आसान है क्योंकि यह हिंदी की तरह इंडो यूरोपियन भाषा वर्ग(Indo-European Group of Languages) से आती है। दोनों भाषाओं के व्याकरण में थोड़े बहुत अंतर अवश्य हैं लेकिन मोटे तौर पर समानताएं बहुत ज्यादा हैं।

एक महत्वपूर्ण तथ्य यह भी है कि अंग्रेज़ी का प्रचलन न केवल हिंदुस्तान में बल्कि दुनिया के अनेक हिस्सों में होने से इसे सीखना आसान हो जाता है। क्योंकि हर कहीं आपको अंग्रेज़ी सुनने का, सुनकर समझने का और थोड़ा बहुत बोलने का मौका भी मिलता रहता है। इस संपर्क की वजह से अंग्रेज़ी हमें कठिन नहीं लगनी चाहिए क्योंकि अंग्रेज़ी के बजाय यदि हमें फ्रेंच, जर्मन, या रशियन जैसी भाषाएं सीखनी हो तो उन्हें सीखना बहुत ही कठिन होगा क्योंकि उन का प्रचलन हिंदुस्तान में नहीं के बराबर है और बाहर के मुल्कों में भी अंग्रेज़ी जैसा व्यापक नहीं है।


दरअसल एक नेगेटिव माइंडसेट हमें अंग्रेज़ी सीखने से रोकता है क्योंकि हम हमेशा इसी भावना से भरे रहते हैं कि अंग्रेज़ी कठिन है और इसे हम कभी भी नहीं सीख सकते हैं और सीख भी लें तो पूरे आत्मविश्वास के साथ अच्छे से बोल नहीं सकते हैं।

सच्चाई यह है कि हमें सकारात्मक सोच यानी पॉज़िटिव थिंकिंग के साथ अंग्रेज़ी सीखने का प्रयत्न ईमानदारी से करना चाहिए। कहते हैं कि बोलना बोलने से आता है, लिखना लिखने से आता है, और पढ़ना पढ़ने से आता है। दूसरे शब्दों में कहें तो जिस भी हुनर का हमें विकास करना हो उसी हुनर पर ध्यान केंद्रित करके हमें अंग्रेज़ी लिखना, पढ़ना और बोलना सीखना चाहिए। यहां एक बात उल्लेखनीय है कि बोलने के लिए सुनना सीखने की जरूरत होती है। कान से सुनना ईश्वर द्वारा प्रदान किया हुआ एक जन्मजात गुण है, परन्तु ध्यान से सुनना एक विशिष्ट गुण है जिसे धीरे-धीरे विकसित किया जाता है। सुनने से बोलना आता है और बोलते रहने से धाराप्रवाह यानी फ़्लुएंटली (fluently) बोलने की शक्ति का विकास होता है। इसलिए सभी सीखने वालों के लिए यह परामर्श दिया जाता है कि वे अंग्रेज़ी भाषा को ध्यान से सुनें और उसी मुताबिक बोलने की कोशिश करें। सबसे बड़ी बात यह है कि हम हमारे मन से यह डर पूरी तरह से निकाल लें कि अंग्रेज़ी कठिन है। डर दूर होते ही ऐसा मान लीजिए कि आधी जंग हम जीत चुके हैं। धीरे-धीरे शांति से व्यवस्थित तरीके से अंग्रेज़ी सीख कर हम अपना जीवन आसान और बेहतर बना सकते हैं।


  • Read in English
  • English is Easy

    Date : 2018-09-08
    Author : Kailash Chandra Sharma


    With regards to English we have various doubts in our minds. Unfortunately we have been told over and over again that English is a difficult language. It is said that when a lie is told again and again it seems to be the truth. As a matter of fact English is very easy because it is a part of Indo-European Group of Languages. Both the languages have certain grammatical differences but broadly speaking there are more similarities than the differences. An important fact is this also that English is not only popular in India but also in various parts of the world. This makes it easy for the learners to learn English. Everywhere you get more or less opportunities to speak English. Due to this exposure only ideally English should not sound difficult to us. Rather than English if we need to learn a language like French, German, or Russian it would be very difficult for us because they are hardly used in India and in the other countries of the world also they are not used as widely as English is used.


    Actually a negative mindset prevents us from learning English because all the time our mind is filled with the idea that English is difficult and we can never learn it , and even if you do so we wouldn't be able to speak it properly with full confidence. The fact is this that we need to learn English with positive mental attitude and honesty. It is said that we learn how to speak by means of speaking, we learn how to write by means of writing and we learn how to read by means of reading.

    In other words we should focus on the skill that we wish to develop and this is how we should learn how to read, write, and speak in English. Here one thing is worth mentioning that we need to learn how to listen in order to speak. Hearing is a gift given by God, but listening ( hearing with attention) is a special quality which is to be developed slowly and gradually. We learn how to speak by means of listening carefully, and by means of speaking constantly we develop ability to speak fluently. Therefore all the learners are advised that they should listen to the things spoken in English attentively and make efforts to speak accordingly. The biggest thing here is that we should throw out all the fear from our mind and we should never feel that English is at all difficult. As soon as this fear is thrown out, we may presume that we have won half the battle. Slowly and gradually, peacefully and systematically we may learn English and make our lives easier and better.





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