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बेहतर जिओ !

विचार

अंग्रेज़ी सीढ़ी-दर-सीढ़ी सीखें

दिनांक : 2018-08-13
लेखक : कैलाश चन्द्र शर्मा

अंग्रेज़ी को दूसरी भाषा के रुप में सीखने वालों को यह जान लेना ज़रुरी है कि व्यर्थ में ज़ल्दबाज़ी करने के बजाय अंग्रेज़ी सीढ़ी-दर-सीढ़ी सीखनी चाहिये। समझदार लोग तो शब्दों से या यूं कहिये कि अक्षरों से शुरुआत करते हैं। फिर वो वाक्य बनाना और मुहावरों का इस्तेमाल आदि सीखते हैं। ऐसा करके भी यानी अक्षरों, शब्दों, वाक्यों और मुहावरों को अच्छी तरह से सीखने के बावज़ूद भी वे उन लोगों से बातचीत नहीं कर पाते जिनकी मातृभाषा अंग्रेज़ी है, सिर्फ इसलिए कि उनमें आवश्यक कौशल (हुनर) और अभ्यास की कमी होती है।

आइये अब हम कल्पना करते हैं कुछ ऐसे विद्यार्थियों की जो किसी तरह से कुछ वाक्य अंग्रेज़ी में बोल भी लेते हैं तो उनसे भी बहुत सारी ग़लतियां होने की संभावना अधिक रहती है। वे सही जगह और सही समय पर, सही शब्द का इस्तेमाल नहीं कर पाते हैं यदि वे a b c d से व्यवस्थित रूप से अंग्रेज़ी न सीखें। अगर हज़ार में कोई एक विद्यार्थी दो-चार वाक्य सही बना भी ले तो वो धाराप्रवाह नहीं बोल पाता। इस प्रकार हम कह सकते हैं कि असली चुनौती सही अंग्रेज़ी को फर्राट बोलना है। शुद्धता और धाराप्रवाहिता दोनों होना चाहिए।

हमें अपनी ज़िदगी में अलग-अलग स्थितियों में अलग-अलग भाव अंग्रेज़ी में व्यक्त करने की आवश्यकता होती है और ऐसा कहना आसान है, करना कठिन। केवल ज्ञान होने से बात नहीं बनती। आपको कौशल भी चाहिये होता है और वो केवल प्रैक्टिस (अभ्यास) से ही आता है। अभ्यास भी केवल सही, शुद्ध, प्रामाणिक ज्ञान के आधार पर होना चाहिये।

कुछ लोग एक ग़लत बयान देते हैं कि अभ्यास करने से पूर्णता-प्रवीणता आ जाती है। सच्चाई यह है कि अभ्यास ऐसा कुछ नहीं करता, वह आपको पूर्ण नहीं बनाता। वह शुद्धता की गैरन्टी भी नहीं देता। दरअसल अभ्यास करने से तो अभ्यास की हुई चीज़ें पक्की हो जाती हैं चाहे वो सही हों या ग़लत। अभ्यास से पूर्णता नहीं पक्कापन आता है, स्थिरता या ठहराव आता है। इसलिये जितनी हो सके, प्रैक्टिस करो लेकिन साथ ही साथ यह भी निश्चित करो कि जिस ज्ञान की आप प्रैक्टिस कर रहे हैं वो प्रामाणिक है, सही है और अप-टू-डेट है।

प्रामाणिकता के लिये ज़रुरी है कि आपका इंग्लिश सीखने का कोर्स भरोसे के काबिल हो। ऐसा कोर्स श्रेणीबद्ध या क्रमबद्ध होना चाहिये यानी पहले सरल, फिर थोड़ा कठिन, फिर और कठिन।

कहना न होगा कि ऐसे कोर्स के निर्माण के लिये अंग्रेज़ी भाषा का गहरा ज्ञान होना ज़रुरी है। आओ सीखो एक ऐसा संस्थान है जिसका दृढ़ विश्वास है अंग्रेज़ी सीखना और सिखाना सीढ़ी-दर-सीढ़ी यानी श्रेणीबद्ध (graded) होना चाहिये। आओ सीखो संस्थान में अंग्रेज़ी प्रशिक्षण को अलग-अलग कोर्सेस में बाँटा गया है और हर कोर्स अनेक यूनिट्स में फिर से बाँटा गया है। हर यूनिट में एक वीडियो है और कुछ एक्सरसाइज़ेस हैं। हमारे पाठ्यक्रमों (कोर्सेस) में बाकी सबके पहले आता है बेसिक इंग्लिश कोर्स। इसके ठीक बाद आता है बिगिनर्स इंग्लिश ग्रामर कोर्स। जैसा कि नाम से ज़ाहिर है बेसिक इंग्लिश कोर्स सिखाता है कि कैसे पढ़ें और कैसे स्पेलिंग बनायें। शब्दों के प्रकार या भाषा के अंग क्या-क्या हैं जैसे नाउन्स (संज्ञाएँ), प्रोनाउन्स (सर्वनाम), वर्ब्स (क्रियाएं), एड्जेक्टिव्स (विशेषण), एड्वर्ब्स (क्रिया-विशेषण), प्रेपोज़िशंस (सम्बन्धसूचक शब्द), कांजक्शंस (समुच्चयबोधक शब्द) और इन्टरजेक्शंस (विस्मयादिबोधक शब्द)। इसमें हर प्रकार के शब्द के उपयोग शामिल होते हैं। जब विद्यार्थी शब्दों के काम या उपयोग सीखता है तो उसकी अंग्रेज़ी में योग्यता बढती है और नतीजतन बदलता है उसका आत्मविश्वास। शब्दों के वर्गों के बारे में स्पष्ट जानकारी मिल जाने पर सीखनेवालों को विभिन्न प्रकार के इन शब्दों के वाक्यों में प्रयोग सीखने की आवश्यकता महसूस होती है। और जब उन्हें सचमुच में रोज़मर्रा की जिन्दगी में काम आने वाले ढेरों वाक्यों का संपर्क मिलता है, उन्हें अंग्रेज़ी भाषा की कार्यशीलता का स्पष्ट ज्ञान हो जाता है। वे जान जाते हैं कि अंग्रेज़ी रोज़मर्रा के जीवन में अनेक उद्देश्यों की पूर्ति कैसे करती है। यह ज्ञान बहुत फ़ायदा पहुंचाता है खासकर एक नए सीखनेवाले को, क्योंकि वो ख़ुद-ब-ख़ुद अंग्रेज़ी भाषा से जुड़ी व्यावहारिकता की प्रशंसा करने लग जाता है।

शब्द माला के फूलों की तरह होते हैं और व्याकरण (grammar) उस धागे की तरह जो माला के हर फूल में से गुजरता है। यही कारण है कि अंग्रेज़ी सीखने में दूसरा कदम व्याकरण सीखना होता है। चूँकि हर भाषा एक नियमों द्वारा शासित (चलने वाला) व्यवहार होती है, और व्याकरण उन्हीं नियमों को सिखाता है इसलिये अंग्रेज़ी व्याकरण पर अधिकार होने का परिणाम होता है अंग्रेज़ी भाषा में शुद्धता। आओ सीखो उपरोक्त तथ्य को मद्देनज़र रखता है और इसीलिए बेसिक इंग्लिश कोर्स के बाद जिस चीज़ का नंबर आता है वो है इंग्लिश ग्रामर कोर्स। जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है, यह कोर्स कई महत्वपूर्ण चीज़ों को कवर करता है जैसे टेन्सेस (काल), सेंटेंस स्ट्रक्चर (वाक्यों की संरचनाएं), एक्टिव-पेसिव वॉइसेस (कर्तृवाच्य और कर्मवाच्य), आदि।


अंग्रेज़ी व्याकरण पर अधिकार होने के बाद सीखनेवालों के आत्मविश्वास की कोई सीमा नहीं होती यानी उनका आत्मविश्वास असीमित रुप से बढ़ जाता है क्योंकि वे अब अपने मन से वे वाक्य बनाने में सक्षम हो जाते हैं जो कि वास्तविक जीवन स्थिति में उपयोग में आते हैं। ऐसा हो जाने पर उनकी रटने-घोटने की आवश्यकता समाप्त हो जाती है और यही बात अंग्रेज़ी सीखने और वापरने वालों को बड़ी राहत देती है। दूसरे शब्दों में कहा जा सकता है कि अंग्रेज़ी व्याकरण का ज्ञान हमें अंग्रेज़ी का और भी सक्षम उपयोगकर्ता बनाता है। शुरुआत में व्याकरण बिगिनर्स लेवल (प्रारंभिक स्तर) का ही होना चाहिए। आओ सीखो ने ठीक यही किया है और बिगिनर्स कोर्स ऑफ़ इंग्लिश ग्रामर प्रकाशित किया। यह सीखनेवालों को सरल सम्प्रेषणात्मक कार्यों में सक्षम बनाता है जैसे वांछित आत्मविश्वास के साथ अंग्रेज़ी में पढ़ना, लिखना, सुनना और बोलना सिखाता है।

इसके बाद तीसरे कदम के रुप में या तीसरे पायदान पर आती है स्पोकन इंग्लिश यानी बोलचाल की अंग्रेज़ी। यह शुरु होती है लोगों का अभिवादन करना सिखाने से और सच पूछा जाये तो समाप्त कहीं नहीं होती है। एक सुव्यवस्थित पाठ्यक्रम होने के नाते इसे व्यावहारिक रुप से कहीं न कहीं तो समाप्त होना ही होता है, लेकिन इस सन्दर्भ में यही कहा जा सकता है कि जितना करो उतना कम है। आओ सीखो ने अत्यंत सावधानी से चुनी हैं तुलनात्मक रुप से अधिक उपयोगी स्थितियां और मनोदशाएँ जिन्हें इस कोर्स का हिस्सा बनाया जा सके। लेकिन ये मानकर चला जाता है कि बाकी सारी चीज़ें भी (जिन्हें कोर्स में शामिल नहीं किया जा सका) बहुत-बहुत उपयोगी हैं और उन्हें आगे के कोर्सेस यानी इन्टरमिडीयेट कोर्स और एडवांस्ड कोर्स में शामिल किया जाएगा।

आओ सीखो के बिगिनर्स इंग्लिश ग्रामर कोर्स में नीचे दिये गये विषय शामिल किये गये हैं,

सूची (अनुक्रमणिका)
01. Introduction (परिचय)
02. Sentences and Their Types (वाक्य और उनके प्रकार)
03. Imperative Sentences (आदेश और निवेदन वाले वाक्य)
04. Declarative Sentences (निश्चयात्मक वाक्य) - Part 1
05. Declarative Sentences (निश्चयात्मक वाक्य) - Part 2
06. Interrogative Sentences (प्रश्नवाचक वाक्य) - Part 1
07. Interrogative Sentences (प्रश्नवाचक वाक्य) - Part 2
08. Exclamatory Sentences (विस्मयादि बोधक वाक्य)
09. Tenses (Introduction) - Part 1
10. Tenses (Introduction) - Part 2
11. Time Markers (समय संकेतक)
12. State Markers (स्थिति संकेतक)
13. Present Indefinite Tense - Part 1
14. Present Indefinite Tense - Part 2
15. Past Indefinite Tense - Part 1
16. Past Indefinite Tense - Part 2
17. Future Indefinite Tense - Part 1
18. Future Indefinite Tense - Part 2
19. Future Indefinite Tense - Part 3
20. Present Continuous Tense - Part 1
21. Present Continuous Tense - Part 2
22. Past Continuous Tense
23. Future Continuous Tense
24. Present Perfect Tense - Part 1
25. Present Perfect Tense - Part 2
26. Past Perfect Tense
27. Future Perfect Tense
28. Present Perfect Continuous Tense
29. Past Perfect Continuous Tense
30. Future Perfect Continuous Tense
31. Conditional Sentences (Introduction)
32. Zero Conditional
33. Conditional Sentences - Type 1
34. Conditional Sentences - Type 2
35. Conditional Sentences - Type 3
36. The Passive Voice – Introduction
37. The Passive Voice - Indefinite Tenses
38. The Passive Voice - Continuous Tenses
39. The Passive Voice - Perfect Tenses
40. Phrases - Introduction & Noun Phrases
41. Phrases - Adjective Phrases & Adverb Phrases
42. Clauses - Introduction and Noun Clauses
43. Clauses - Adjective Clauses
44. Clauses - Adverb Clauses
45. Simple, Compound & Complex Sentences
46. Simple Sentences
47. Compound Sentences
48. Complex Sentences
49. Punctuation Part 1
50. Punctuation Part 2
51. Capitalization

अंत में यह दोहराया जा रहा है की अंग्रेज़ी को सीढ़ी-दर-सीढ़ी सीखना एक अच्छा विचार है। यह तर्कसम्मत भी है और इसीलिए न्यायोचित भी है। किसी भी व्यक्ति को जल्दबाज़ी नहीं करनी चाहिए क्योंकि सीखने में धैर्य और लगन की ज़रुरत होती है। र्फ़ व्यवस्थित सीखना ही योग्यता और आत्मविश्वास में परिणीत होगा।


  • Read in English
  • Learn English Step-by-Step

    Date : 2018-08-13
    Author : Kailash Chandra Sharma


    All the learners of English as a Second Language (ESL) need to know that they have to learn English step by step rather than hurrying uselessly. Sensible people start from words, rather letters. Then they learn sentence formation and idioms etc. Despite having learnt letters, words, sentences and idioms very well, they cannot talk to native speakers simply because they lack necessary skill and practice.

    Let’s now assume certain learners who somehow manage to speak same sentences in English, they are also most likely to make too many mistakes. They cannot use the right word at the right place and time unless they learn English systematically, from a-b-c-d. Even if one in a thousand learners forms a couple of sentences with accuracy, he or she would lack fluency. Thus we can say that the real challenge lies in speaking English with both accuracy and fluency.

    There are varieties of moods and situations we need to use our English in, and it is easier said than done. Knowledge alone cannot help. You would need skills also and they can be acquired by regular practice only. Practice must also be accompanied by proper and authentic knowledge.

    Some people wrongly state that practice can ensure perfection. Truly speaking practice doesn’t do so. It doesn’t guarantee accuracy. Practice, in fact, reinforces what you practice, be it right or wrong. It doesn’t bring about perfection, it brings about stability in what you practice. Therefore keep practicing English as much as you can while making sure that all that you practice is authentic and up-to-date.

    For the aforesaid authenticity we have to have a dependable course to rely on. Such a course must be a graded one, in other words, having a step-by-step approach. Needless to say that preparation of this type of course requires an in-depth knowledge of English language. Aao Seekho Sansthan is one such institution that has a firm belief in going step-by-step whether it’s a matter of learning English or teaching English. At Aao Seekho Sansthan training of English has been divided into various courses and each course has been further divided into various units. Each unit is comprised of a video and some exercises.

    Among our courses Basic English Course precedes rest of the courses. It is followed by Beginners’ English Grammar Course. As the name suggests Basic English Course teaches how to read and spell words, types of words (parts of speech: Nouns, Pronouns, Verbs, Adjectives, Adverbs, Prepositions, Conjunctions and Interjections). It covers the variety of uses of each type of words. When learners learn the functions or uses of the words their competence to use English goes up paving the path of self-confidence. Having had a clear idea about the categories of words the learners of English require to have an exposure to the different types of words being used in sentences. When they really have an exposure to so many sentences in English that are used in day-to-day life, they get a crystal clear idea regarding functionality of English language. They get to know how English serves various purposes in day-to-day life. This knowledge or realization pays a lot, particularly to a new learner as he or she automatically begins to admire the practicality pertaining to English language.

    Words are like flowers of a garland and grammar is like a thread that passes through all the flowers of the garland. That is why the 2nd step towards learning English is learning English grammar. Since every language is a rule-governed behavior and grammar deals with those rules, therefore having a command on English grammar results into accuracy in the use of English language. ‘Aao Seekho’ takes the aforesaid fact into consideration and that is why after the Basic English Course what follows is Beginners’ English Grammar Course. As the name points out, this course covers vital things like tenses, sentences, structures, active-passive voices and the like.


    Having commanded the English Grammar the confidence of the learners knows no bounds as they are capable of forming the sentences of their own that are useful in a variety of real life situations. Once this is done, then there is no requirements of cramming things and this gives tremendous relief to the users of English. In other words the knowledge of grammar makes us more competent users of English. Grammar in the beginning has to be of Beginners’ level. Aao Seekho has precisely done that by publishing Beginners’ Course of English Grammar. It enables the learners to do simple communicative tasks like reading, writing, listening and speaking in English language with reasonable confidence.

    What follows next at the 3rd stage is ‘Spoken English’. It begins with greeting people and ends nowhere in the true sense. In order to be an organized course it does stop somewhere practically, but a lot is a little in this context. Aao Seekho has carefully chosen relatively more useful situations and moods to be parts of this course but it is taken for granted that rest of the things are also very very important and that they would be incorporated in Intermediate and Advanced English Courses later.

    Beginners’ English Grammar Course of Aao Seekho includes the following topics:
    01. Introduction (परिचय)
    02. Sentences and Their Types (वाक्य और उनके प्रकार)
    03. Imperative Sentences (आदेश और निवेदन वाले वाक्य)
    04. Declarative Sentences (निश्चयात्मक वाक्य) - Part 1
    05. Declarative Sentences (निश्चयात्मक वाक्य) - Part 2
    06. Interrogative Sentences (प्रश्नवाचक वाक्य) - Part 1
    07. Interrogative Sentences (प्रश्नवाचक वाक्य) - Part 2
    08. Exclamatory Sentences (विस्मयादि बोधक वाक्य)
    09. Tenses (Introduction) - Part 1
    10. Tenses (Introduction) - Part 2
    11. Time Markers (समय संकेतक)
    12. State Markers (स्थिति संकेतक)
    13. Present Indefinite Tense - Part 1
    14. Present Indefinite Tense - Part 2
    15. Past Indefinite Tense - Part 1
    16. Past Indefinite Tense - Part 2
    17. Future Indefinite Tense - Part 1
    18. Future Indefinite Tense - Part 2
    19. Future Indefinite Tense - Part 3
    20. Present Continuous Tense - Part 1
    21. Present Continuous Tense - Part 2
    22. Past Continuous Tense
    23. Future Continuous Tense
    24. Present Perfect Tense - Part 1
    25. Present Perfect Tense - Part 2
    26. Past Perfect Tense
    27. Future Perfect Tense
    28. Present Perfect Continuous Tense
    29. Past Perfect Continuous Tense
    30. Future Perfect Continuous Tense
    31. Conditional Sentences (Introduction)
    32. Zero Conditional
    33. Conditional Sentences - Type 1
    34. Conditional Sentences - Type 2
    35. Conditional Sentences - Type 3
    36. The Passive Voice – Introduction
    37. The Passive Voice - Indefinite Tenses
    38. The Passive Voice - Continuous Tenses
    39. The Passive Voice - Perfect Tenses
    40. Phrases - Introduction & Noun Phrases
    41. Phrases - Adjective Phrases & Adverb Phrases
    42. Clauses - Introduction and Noun Clauses
    43. Clauses - Adjective Clauses
    44. Clauses - Adverb Clauses
    45. Simple, Compound & Complex Sentences
    46. Simple Sentences
    47. Compound Sentences
    48. Complex Sentences
    49. Punctuation Part 1
    50. Punctuation Part 2
    51. Capitalization

    In the end it is to be reiterated that learning English step-by-step is a good idea. It is logical and therefore justified. One should not hurry because learning needs patience and perseverance. Systematic learning alone would result into competence and self-confidence.





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