Follow Us

Comment Box
Register
Login
बेहतर जिओ !

विचार

हिन्दी माध्यम से भी अंग्रेज़ी सीखी जा सकती है

दिनांक : 2017-10-28
लेखक : कैलाश चन्द्र शर्मा

हम में से कई लोग सोचते हैं कि बगैर बेसिक इंग्लिश और इंग्लिश ग्रामर पर अधिकार के स्पोकन इंग्लिश (बोलचाल की अंग्रेज़ी) सीखना संभव है। सच पूछा जाए तो बिना बेसिक इंग्लिश ग्रामर के अंग्रेज़ी बोलना बिल्कुल असंभव है। बेसिक इंग्लिश यानी बुनियादी अंग्रेज़ी का मतलब है सरल अंग्रेज़ी जिसे उन लोगों के सीखने-सिखाने के लिये सरल बनाया गया है जो अंग्रेज़ी को दूसरी भाषा के रुप में सीखते हैं। जिनकी मातृभाषा अंग्रेज़ी नहीं होती है। कांसेप्ट क्लियर नहीं होने से यानी वैचारिक स्पष्टता के अभाव में अंग्रेज़ी में भ्रमित हो जाते हैं और कभी तो स्पोकन इंग्लिश (बोलचाल की अंग्रेज़ी) और रिटन इंग्लिश (लिखने की अंग्रेज़ी) के बीच निरुद्देश्य भटकते रहते हैं।

अगर आपकी मातृभाषा अंग्रेज़ी नहीं है तो आपके लिये सीधे बोलचाल की अंग्रेज़ी पर कूद पड़ना उचित नहीं है। बहुत से अंग्रेज़ी सीखने वाले या तो अंग्रेज़ी को एक विदेशी भाषा के रुप में या फिर मातृभाषा के साथ-साथ दूसरी भाषा के रुप में सीखते हैं। इसीलिए उन्हें अपनी मातृभाषा के माध्यम से अंग्रेज़ी सीखने की ज़रुरत महसूस होती है। भारत में शुरुआती लेवल से अंग्रेज़ी सीखने वाले आमतौर पर हिन्दी मीडियम से ही अंग्रेज़ी सीखना चाहते हैं। वे कहते तो यही हैं ‘हम हिन्दी में अंग्रेज़ी सीखना चाहते हैं’, जबकि उनका कहने का मतलब होता है कि वे हिन्दी के द्वारा या हिन्दी की सहायता से अंग्रेज़ी सीखना चाहते हैं। वे बुनियादी अंग्रेज़ी शब्द हिन्दी अनुवाद सहित चाहते हैं। वे इंग्लिश ग्रामर के नियम भी हिन्दी में अनुवाद किये हुए चाहते हैं। वे चाहते हैं कि ये नियम उन्हें विस्तार से हिन्दी में समझाए जाएं। यहाँ तक कि 'इज़', 'एम', 'आर', 'वाज़', 'वर', 'दिस' और 'दैट' जैसे शब्दों को भी अंग्रेज़ी से हिन्दी में अनुवाद सहित सिखाये जाने की अपेक्षा की जाती है।

उपरोक्त अपेक्षा में कुछ ग़लत भी नहीं है। यदि अंग्रेज़ी को शुरु से सीखने के इच्छुक भारतीय विद्यार्थी अंग्रेज़ी सरलता से सीढ़ी-दर-सीढ़ी व्यवस्थित तरीके से सीखना चाहते हैं, तो उनके लिये हिन्दी माध्यम से अंग्रेज़ी सीखने-सिखाने की मांग करना ठीक ही तो है। यहाँ हमारा अभिप्राय ग्रामर-ट्रांसलेशन मेथड (व्याकरण-अनुवाद पद्धति) से नहीं है। उस पद्धति में रटाई बहुत की जाती है। दरअसल हिन्दी की सहायता से अंग्रेज़ी सीखने का तात्पर्य है ज्ञात से अज्ञात की ओर जाना, जो हम जानते हैं उसकी सहायता से अनजान बातों को जानना। चूंकि हिन्दी वे जानते हैं और इसको माध्यम बनाकर वे वो अंग्रेज़ी सीखना चाहते हैं जो उनके लिये अनजानी है, अज्ञात है। जब वे अंग्रेज़ी और हिन्दी की तुलना करते हैं तो वे अंग्रेज़ी में पढ़ना, लिखना और बोलना आसानी से सीख जाते हैं।


2014 में इसकी शुरुआत के समय से ही आओ सीखो संस्थान एक व्यावहारिक और तार्किक दृष्टिकोण वाली पद्धति का विकास करता आया है जिससे अंग्रेज़ी सिखाई जा सके। यह हिन्दी मीडियम से अंग्रेज़ी सिखाने की पद्धति है। यह परिणाम है समय की कसौटी पर जाँच-परखकर देखी गई एक मनोवैज्ञानिक पद्धति का जिसमें पहले बेसिक इंग्लिश, ग्रामर और बाद में बोलचाल की अंग्रेज़ी (स्पोकन इंग्लिश) सिखाई जाती है। इस भाषा की फ़िलॉसफी को स्टडी-सेन्टर बेस्डोनक्सTM के विशेषज्ञ कोर्स लेखकों द्वारा दशकों के अनुभव के साथ संजोया है और इससे अलग-अलग एज-ग्रुप्स और अलग-अलग योग्यता वाले लगभग एक लाख विद्यार्थियों को अंग्रेज़ी सफलतापूर्वक सिखाई है। इन विशेषज्ञों की पक्की मान्यता है कि हिन्दी माध्यम द्वारा पढ़ाये जाने से हिन्दी भाषा-भाषी शिक्षार्थियों के लिये अंग्रेज़ी सीखना एकदम आसान हो जाता है।

इस प्रकार यह साफ़ हो चुका है कि हिन्दी माध्यम में अंग्रेज़ी पढ़ना, लिखना और बोलना सीखना उचित और उपयोगी है। इस तरह से सीखने को लेकर हमारे मन में डर या आशंका नहीं होनी चाहिये। यह पद्धति कारगर है और रहेगी क्योंकि यह लाखों लोगों को अंग्रेज़ी सिखाने में पहले ही कारगर सिद्ध हो चुकी है। इसलिये बिना किसी तनाव, चिंता और परेशानी के अंग्रेज़ी सीखने के लिये कदम बढ़ाओ। आपकी मदद के लिये आओ सीखो तो है ही।


  • Read in English
  • English Can be Learnt through Hindi Medium also

    Date : 2017-10-28
    Author : Kailash Chandra Sharma


    Many of us think that it is possible to learn Spoken English without having a command on Basic English or English Grammar. Truly speaking it is next to impossible to speak English without learning Basic English Grammar. Basic English means simplified English for learning English or teaching English as a second language. Due to lack of conceptual clarity confused learners of English keep switching over from Spoken English to Written English unnecessarily and fruitlessly.

    No one should directly jump to Spoken English unless they are native learners. Many English learners learn English as a Foreign Language (EFL) or English as a Second Language (ESL) and that is why they need their mother tongue as a medium. In India the beginners’ level English learners usually want to learn English in Hindi medium. They say, ‘We want to learn English in Hindi’ while they mean to say that they wish to learn English through Hindi. They want basic English words with Hindi translation. They want English grammar rules translated in Hindi or thoroughly explained in Hindi. Even words like ‘is', 'am', 'are', 'was', 'were', 'this', 'that', 'it’ are expected to be taught with their proper translation from English to Hindi.

    There is nothing wrong in the aforesaid expectation. If Indian learners of English language in basic level want to learn English easily and systematically (step-by-step), it is fair on their part to demand Hindi as a medium of teaching or learning. It is not Grammar-translation Method (GTM) in literal sense. In fact learning English through Hindi means a shift from known to unknown. Hindi is ‘known’ to such learners and they want to learn English which is ‘unknown’ to them. When they compare and contrast Hindi and English, they learn to read, write and speak in English easily.


    Ever since its inception in 2014, Aao Seekho Sansthan has been fostering a logical and practical approach to English language teaching. The approach is one of teaching English in Hindi medium. It is a result of a time-tested, psychologically approved method of imparting training of Spoken English preceded by Basic English and English Grammar. This philosophy of a language is being cherished by the expert content-developers of Study Centre BasedonexTM having experience of decades. Roughly a hundred thousand students of various age-groups and ability groups have been taught English Grammar and Spoken English by these experts. They are of the firm opinion that English learning is easier for Hindi-speaking people if it is taught using Hindi as a medium of teaching.

    Thus it is clear that learning, how to read, write and speak English is advisable in Hindi medium. We should not have any doubts whatsoever regarding the success in learning this way. It works and will work because it has already worked in innumerable cases and benefitted millions of learners of English world over. Therefore embark on the path of learning English without any tension, trouble or worries. Aao Seekho is there to help you out.





Comments