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बेहतर जिओ !

विचार

जिंदगी लम्बी हो या अच्छी

दिनांक: 2014-11-19
लेखक: कैलाश चन्द्र शर्मा

'ईश्वर तुम्हें दीर्घायु करे ।' 'खुदा तुम्हें लम्बी उम्र दे ।' 'तुम जिओ हजारों साल ।' जैसे आशीर्वाद और शुभकामना संदेश थोक में लिए जाते हैं, थोक में दिए भी जाते हैं । परन्तु वास्तव में जब मूल्यांकन होता है तो जीवन की सफलता जिए गए सालों से नहीं, किए गए कामों से आंकी जाती है । किये गए काम ज्ञान पर निर्भर करते हैं । ज्ञान प्रशिक्षण (ट्रेनिंग) पर निर्भर करता है और ट्रेनिंग निर्भर करती है, कुशल प्रशिक्षकों पर और अच्छे भाषा-ज्ञान पर ......।

जी हाँ, अच्छे भाषा ज्ञान के बिना पुस्तकें बोझ लगती हैं, पढ़ाई बोर करती है, लेक्चर्स एक समस्या बन कर सामने आते हैं । लिखने में कंटाला आता है यानी अटपटा लगता है । दूसरे शब्दों में ज्ञान का या हुनर का शिक्षण–प्रशिक्षण भाषा–ज्ञान के बिना कठिन हो जाता है । भाषा सीखना दूसरे विषय सीखने से अलग है । आप भूगोल या भौतिक शास्त्र सीखे बिना हिंदी, अंग्रेजी या कोई भी भाषा सीख सकते हैं परन्तु भाषा के बिना कोई भी विषय नहीं सीख सकते । इसलिए भाषा व्यवस्थित तरीके से सीखें और जिंदगी के अच्छा होने का रास्ता साफ़ करें । याद रखें, आपके बॉस का भाषा ज्ञान आप से अच्छा है और यह भी एक कारण है कि वह आपका बॉस है ।

कौन सी भाषा सीखें ? यह प्रश्न उठना स्वाभाविक है । हम सोचते हैं कि मातृभाषा का कोई सानी नहीं, चाहे वह जो भी हो, उसे और अच्छी तरह से सीखें । यदि हिंदी आपकी मातृभाषा नहीं है तो उसे अपनी मातृभाषा के साथ-साथ सीखें और राष्ट्र की मुख्य धारा से जुडें । हिंदी के अलावा अंग्रेज़ी पर अधिकार करनें कि योजना बनाएं और योजना पर अमल करें । हमारा नारा है हिंदी से पूरा प्यार करें, अंग्रेज़ी पर भी अधिकार करें याद रखें एक प्यार की हकदार है तो दूसरी अधिकार की मोहताज है । हिंदी भारत की धड़कन है और अंग्रेज़ी विश्व को देखने की खिड़की । यही खिड़की आपकी प्रगति का पासपोर्ट भी है, इसलिए इसके महत्व को अनदेखा न करें ।

अंग्रेजी सीखने के लिए किसी योग्य प्रशिक्षक या अच्छे इंस्टिट्यूट का सहयोग लें । ऐसा करने से आपका सालों का काम महीनों में हो जायेगा और महीनों का काम कुछ हफ़्तों में ही हो जायेगा । जो संस्थान ऑडियो-वीडियो उपकरणों से और उन्नत अत्याधुनिक पद्धतियों से सिखाते है उनकी मदद लें । एक नहीं, दो या तीन इंस्टिट्यूट में जाकर कुछ दिन स्वयं बैठकर तय करें कि आपके लिए क्या मुनासिब है । माता पिता तो हम नहीं चुन सकते ,प्रशिक्षक और मित्र चुन सकते हैं । अतः अपने चयन के अधिकार का खुलकर प्रयोग करें। सुनी-सुनाई बातों पर यकीन न करें । स्वयं देखें, परखें और चुनें । याद रखें आपकी ज़िन्दगी की गुणवत्ता आपको स्वयं तय करना है और उस तक पहुँचने का रास्ता आपको ही तय करना है । मंज़िलें मेहनत की भी मोहताज होती हैं और अच्छी प्लानिंग की भी । केवल मेहनत से ही नहीं बल्कि अच्छी सुव्यवस्थित प्लानिंग और पक्के संकल्पों से भी आप अपना जीवन संवार सकते हैं ।

अपने व्यक्तित्व को स्वयं तराशिये, अपने निर्णय सबके परामर्श के बाद स्वयं लीजिये , युवाओं के लिए मेरी लिखी चार पंक्तियाँ आपके विचार हेतु प्रस्तुत है :

तू सिर्फ स्वप्न देख मत , उन्हें बना के सच दिखा ।
तू सीख आ विदेश से, बाद में हमें सिखा ।
तू श्रम-दवात में डुबा , कर्म की कलम चला ।
लिख दे निज ललाट पे , जो नहीं गया लिखा ।



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