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बेहतर जिओ !

विचार

करियर प्लानिंग का विवेकपूर्ण तरीका

दिनांक: 2014-11-19
लेखक: कैलाश चन्द्र शर्मा

सन् 1945 में जापान में नवनिर्माण प्रारम्भ हुआ और सिर्फ दो साल बाद 1947 में भारत आजाद हुआ, किंतु गति-प्रगति के मामलें में भारत से जापान दो नहीं दो सौ साल आगे है । खनिजों और प्राकृतिक संसाधनों के अलावा उत्कृष्ट मानव संसाधन भी भारत में विपुल हैं, जापान में नहीं । मौसम और भौगोलिक भी भारत के अनुकूल हैं, जापान में नहीं । पर ऐसा क्या है ? क्या है जापान की प्रगति का राज़ ?

उपरोक्त गंभीर प्रश्न का सीधा सा जवाब है– प्लानिंग यानी नियोजन । किसी जापानी विद्वान् ने एक भारतीय विद्वान् से कुछ यूँ कहा था कि भारतीय एक साल में पंचवर्षीय योजना बनाते हैं , जबकि जापानी पांच साल में एक वर्ष की योजना बनाते हैं, योजना इतनी, व्यावहारिक. सुन्दर, गणना-आधारित और व्यापक सन्दर्भ वाली होती है कि सफलता उसके चरण चूमती है । संतुलित नियोजन और समुचित क्रियान्वयन सफलता की ग्यारंटी है, बात चाहे देश के विकास की हो या व्यक्ति के विकास की । व्यक्ति अपने करियर की योजना बनाकर उस पर सिलसिलेवार अमल न करे तो भविष्य संवरना संभव नहीं है । भविष्य नियोजन यानी करियर प्लानिंग करते समय कम से कम इन बातों का ध्यान रखना आवश्यक है – 1 रूचि क्षेत्र (Area of Interest) 2 शैक्षणिक उपलब्धियां (Educational Achievement) 3 पारिवारिक पृष्ठभूमि (Family Background) 4 पाठ्यक्रमों की उपलब्धता (Availability of Courses) 5 अभिक्षमता (Aptitude) 6 अभिवृत्ति/मनोवृत्ति (Attitude) ।

अपनी रूचि पहचानें- किसी को आलू पसंद होते हैं तो किसी को प्याज, तो किसी को कद्दू । कारण तो हम जानें या परमात्मा जाने , किंतु पसंद या रूचि या रुझान तो होते ही हैं। करियर की योजना बनाते समय रूचि को नज़रअंदाज़ करना एक गंभीर भूल होती है। अतः अपनी रूचि के अनुसार करियर चुनें । इससे कम शक्ति लगाकर ऊँची सफलता जल्दी मिलने का रास्ता खुलता है । यदि आपकी रूचि गायन में है तो अपने आपको मारपीट कर डॉक्टर बनाने की कोशिश न करें । कई बार रूचि सकारण होती है और कारण आपको मालूम भी होता है, जैसे- कभी बचपन में मिला हुआ प्रोत्साहन, कोई छोटी-बड़ी उपलब्धि, अपने आदर्श का प्रभाव आदि । अपनी रूचि का भी सम्मान करें, रूचि का ही नहीं ।

देखें, क्या खोया, क्या पाया– शिक्षा में अब तक आपने क्या खोया, क्या पाया, यह अवश्य देख लें। आपकी अब तक की शैक्षणिक उपलब्धियां आपके करियर की ओर इशारा करती हैं । गणित में उच्च अंक आपके गणितज्ञ या वैज्ञानिक या तकनीशियन बनने का संकेत देते हैं। जीव विज्ञान में अच्छे मार्क्स आपके डॉक्टर बनने के समर्थन में खड़े रहते हैं । भाषाओं में अच्छे अंक आपके पत्रकारिता, लेखन, साहित्यकार व भाषा के अध्यापक-प्राध्यापक बनने की दिशा में बढ़ने की प्रेरणा देते हैं । अपनी शैक्षणिक उपलब्धी का लेखा- जोखा पूरी तरह से सामने रखकर करियर कि योजना बनाएं ।

पारिवारिक पृष्ठभूमि है अत्यंत महत्वपूर्ण– परिवार आपके संस्कारों की पहली पाठशाला है और आपकी भविष्य की दिशा रेखा को तय करने में इसका स्थान जितना आप सोचते होंगे , उससे कहीं अधिक है। कुछ लोगों को कुछ गुण खून से या खानदान से मिले होते हैं । उदाहरण के लिए जिस व्यक्ति कि पिछली पांच- दस पीढ़ियाँ संगीत या नृत्य या स्वर्ण आभूषणों कि कारीगरी में निपुण हैं, उस व्यक्ति की क्रमशः संगीत , नृत्य व स्वर्णकारी में सफलता की संभावना आम आदमी से अधिक है । १०० में से १०० मामलों में यह बात लागू नहीं होती । फिर भी ९० मामलों में लागू होती है । इस बात का अर्थ यह नहीं की व्यक्ति पुश्तैनी व्यवसाय ही करे, किंतु यदि बदलाव की बड़ी वजह नहीं हो तो पुश्तैनी व्यवसाय के बारें में विचार अवश्य करें । दूसरों की थाली में अधिक घी देखने वालों, न भूलें की दूर के ढोल सुहावने लगते हैं । आपको विरासत में मिला ज्ञान व अनुभव कीमती है, इनकी कद्र करना सीखें ।

जमीनी हकीक़त को न भूलें- आदर्शवादी या पूर्णतावादी न बनें । जो पाठ्यक्रम आप करना चाह रहे हैं , वह यदि लंदन में उपलब्ध है और लंदन जाना आपके वश की बात नहीं तो उस असंभव सी कल्पना से मोह पालकर न बैठें । जो जीवन का भाग नहीं है वह कोरे कागज़ों का भाग क्यों रहे । बेहतर है अन्य रास्ते तलाशें । स्वप्न देखना जितनी अच्छी बात है , उससें अधिक अच्छी बात है , उन्हें सच्चाई में बदलना । इस लेख का लेखक “सामुदायिक विकास” में स्नातक होना चाहता था , और वह विषय विश्वविद्यालय के पाठ्यक्रमों की सूची में भी था किंतु उसका अध्यापन उस जमानें में केवल गर्ल्स कॉलेज में ही होता था । अतः इस विषय की उपलब्धता होकर भी नहीं होने के जैसी ही थी। फिर क्या था, लेखक ने संभव राह पकड़ी और आज तक नहीं पछताया । अब कोई आदर्शवादी कहे, “क्या लेखक लड़की बनने का प्रयास नहीं कर सकता था ?” तो उनसे इतना विद्वान न होने के लिए क्षमा ही मांगी जा सकती है । करियर गाइडेंस के फील्ड में दिल और दिमाग में से दिमाग को ऊँचा मुकाम हासिल है और होना भी चाहिए ।

आपकी मनोवृत्ति आपके लिए सर्वोच्च है- किसी ज़माने में व्यक्ति में निहित संभावित क्षमता यानी अभिक्षमता को करियर प्लानिंग की आधारशिला समझा जाता था, किंतु आज व्यक्ति की अभिवृत्ति यानी नज़रिये को अधिक महत्व दिया जाता है । कहा भी जाता है कि तुम्हारी मंज़िल की ऊँचाई अभिक्षमता नहीं अभिवृत्ति तय करती है । (Your altitude is determined by attitude, not aptitude.)

संभव को असंभव न समझें- करियर के नियोजन और उसकी योजना के क्रियान्वयन में कई बार व्यक्ति बिना वजह डरने की आदत का शिकार होता है । कई रास्ते खुले होते हैं, बस आपका दिमाग खुला होना चाहिए । कहते हैं कि दुनिया में सबसे तेजी से अगर कुछ मरता है तो वह है बंद दिमाग में नया विचार ।

खुले दिमाग से दिल कि बात को भी यथोचित महत्व देकर अपने रूचि व क्षमता के अनुसार करियर चुनें और उसकी राह पर अपने नपे-तुले कदम उठाएं । भविष्य की उज्जवलता आपको अपने आगोश में लेने को बेताब है, बाँहें पसारें और कहें कि आप अपनी दुनिया को जगमग करने की आस लिए सपनों की नगरी में मंगल प्रवेश कर रहे हैं । साहस के उजालों को गले लगायें, कायरता के अँधेरों को अलविदा कहें, शक्ति सपन्न बनें और एक उदाहरण कायम करें ।



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