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विचार

ग़लत ऑनलाइन कोर्सेस के भयानक नुकसान

दिनांक : 2018-10-24
लेखक : कैलाश चन्द्र शर्मा

यदि आप ऑनलाइन कुछ भी सीखना चाहते हैं, चाहे आपको अंग्रेज़ी सीखना हो या कोई अन्य चीज़, तो आपके पास सही चयन की क्षमता होनी चाहिये। कहने का अभिप्राय यह है कि आपको यह चुनते आना चाहिये कि कौन सा कोर्स और कौन सी वेबसाइट आपके लिए उपयोगी हो सकती है।


सबसे पहले यह समझ लें कि हर वो चीज़ जो आपको नहीं आती है, आपकी कमी नहीं होती है। आपकी कमी या कमज़ोरी होती है वह चीज़ और वे बातें जो आपको आना चाहिये लेकिन नहीं आती हैं। उदाहरण के लिए, यदि आपके जीवन में अंग्रेज़ी की आवश्यकता है और फिर भी आप उसे नहीं जानते हैं या फिर अच्छी तरह से नहीं जानते हैं तो आपको उसे सीखने का विचार करना चाहिये। अब आपको अंग्रेज़ी के लिए एक अच्छी पुस्तक, एक अच्छा इंस्टीट्यूट, और एक अच्छा टीचर चुनना चाहिये। लेकिन यदि आप अंग्रेज़ी ऑनलाइन सीखना चाहते हैं तो आपको अच्छी डिपेंडेबल वेबसाइट का सहारा लेना चाहिए।

होता यह है कि आप अनुभव की कमी या नासमझी की वजह से एक ग़लत वेबसाइट को सीखने के लिए चुन लेते हैं और बजाय फ़ायदा होने के आपको नुकसान होने लगता है। सबसे बड़ा नुकसान, ऐसे मामलों में समय का होता है। कहते हैं कि पैसे की भरपाई तो फिर भी हो जाती है लेकिन खोया हुआ समय वापस नहीं आता। एक और बड़ा नुकसान ग़लत ऑनलाइन एजुकेशनल वेबसाइट से यह होता है कि आप जो कुछ अच्छा जानते हैं वह भी करप्ट हो जाता है और आप अपना स्वाभिमान और आत्मविश्वास खो देते हैं । कोशिश यह करें कि जो कुछ भी सीखें वह स्टैंडर्ड और विश्वसनीय वेबसाइट से ही सीखें।

दूसरे शब्दों में कहा जा सकता है कि ‘समथिंग इस बेटर देन नथिंग, बट नथिंग इज बेटर देन नॉनसेंस’ यानी कुछ नहीं से कुछ अच्छा पर बकवास से तो 'कुछ नहीं' ज़्यादा अच्छा।

सीखने का उद्देश्य होता है जीवन को बेहतर बनाना, अपने ज्ञान में बढ़ोतरी करना, और जीवन की समस्याओं को पहले की अपेक्षा बेहतर तरीके से हल करने की काबिलियत पैदा करना। जब आपके ज्ञान का सोर्स यानी उदगम ही ग़लत होगा, तो क्या तो काबिलियत पैदा होगी और क्या ही ज्ञान में बढ़ोतरी होगी?

संक्षेप में यह कहा जा सकता है कि ग़लत वेबसाइट से सीखने की बजाए न सीखा जाए वो ही अच्छा। आजकल हज़ारों लोग ऑनलाइन कोर्सेस चलाते हैं और सबस्टैण्डर्ड वीडियोज़ को अपलोड कर देते हैं उनमें न तो कोई सब्सटेंस होता है, न ही ऑथेंटिक नॉलेज यानी प्रामाणिक ज्ञान। वीडियोज़ बनानेवाले भी न तो क्वालिफ़ाइड होते हैं न ही उन्हें पढ़ने-पढ़ाने का कोई अनुभव होता है। आम आदमी की समस्या यह है कि वह इनके झांसे में आ जाता है और जो कुछ थोड़ा बहुत ज्ञान उसके पास पहले से होता है उसे भी वह बिगाड़ लेता है या खत्म कर देता है।

सोशल मीडिया पर ऑनलाइन कोर्सेस की बाढ़ आ चुकी है और कहना न होगा कि बाढ़ का पानी अक्सर गंदा होता है। हर सीखनेवाले को सबसे पहले यह पक्का कर लेना चाहिए कि सिखानेवाला व्यक्ति एक योग्य यानी क्वालिफ़ाइड और अनुभवी व्यक्ति है या नहीं, उसे पढ़ाने का अनुभव है या नहीं, उसकी प्रोफाइल क्या है और सिखाने के पीछे उसका उद्देश्य क्या है।

हम लोग 10-20 रुपये की चीज़ भी सोच-समझकर खरीदते हैं तो अपना अनमोल समय बकवास वेबसाइट्स और रद्दी वीडियोज़ पर कैसे खर्च कर सकते हैं? यह कभी नहीं सोचें कि कैसे भी हों, वीडियोज़ देखने में हमारा जाता क्या है, कुछ नहीं तो थोड़ा मनोरंजन ही हो जाएगा। बजाय इसके यह सोचें कि हमारा समय और पहले से सीखा हुआ ज्ञान बहुत-बहुत कीमती है और ग़लत वेबसाइट्स पर कोर्सेस करने से हम यह दोनों ही कीमती चीजें खो बैठते हैं। आपके जीवन में से यदि समय निकाल दिया जाए तो जीवन में रह ही क्या जाएगा इसलिए समय की बर्बादी को सबसे बड़ी बर्बादी मानें और टपोरी लोगों द्वारा बनाए गए सड़क छाप वीडियोज़ कभी ना देखें और उनकी वेबसाइट्स से सीखने के नाम पर समय, ऊर्जा और ज्ञान का सर्वनाश न करें। आप जब किसी अशिक्षित या अर्ध प्रशिक्षित चिकित्सक से यानी डॉक्टर से इलाज नहीं लेते तो किसी सड़क चलते व्यक्ति से सिखाने का महत्वपूर्ण काम कैसे ले सकते हैं। बस एक ही बात का ध्यान रखें हर व्यक्ति को, वो जो भी काम करता है, उसे उस काम को करने का अधिकार होना चाहिये और अधिकार कर्तव्य से आता है। जिसने सीखा है वही सिखा सकता है। जो दीपक खुद जल रहा हो वहीं अन्य दीपकों को जला सकता है।






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