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विचार

स्पोकन इंग्लिश की प्रैक्टिस कैसे करें

दिनांक : 2018-10-03
लेखक : कैलाश चन्द्र शर्मा

बहुत से लोगों को यह लगता है कि अंग्रेज़ी, ख़ासकर बोलचाल की अंग्रेज़ी यानी स्पोकन इंग्लिश का अभ्यास करने के लिए उनके साथ बहुत से अंग्रेज़ी बोलनेवाले लोग होने चाहिये। लेकिन यह सच नहीं है, सच्चाई यह है कि हम कुछ सृजनात्मक यानी क्रिएटिव तरीकों से अंग्रेज़ी की प्रैक्टिस कर सकते हैं। दरअसल, अंग्रेज़ी की प्रैक्टिस करने के पहले हम यह समझ लें कि अंग्रेज़ी हो या हिंदी हर भाषा मोटे तौर पर बोलने के लिए होती है और बोलना हमेशा सुनने से आता है इसलिए हम सभी सबसे पहले इंग्लिश लिस्निंग यानी अंग्रेज़ी में सुनने की प्रैक्टिस करें। ऐसा कहा जाता है कि “लिस्निंग इज़ अ हंड्रेड टाइम्स मोर इंपॉर्टेंट देन स्पीकिंग” यानी सुनना बोलने से सौ गुना अधिक महत्वपूर्ण है। दूसरे शब्दों में आप यह भी कह सकते हैं कि “तानसेन” बनने से पहले आपको “कानसेन” बनना चाहिये क्योंकि अच्छा श्रोता ही अच्छा वक्ता बनता है। शायद यह सच्चाई कई लोगों को अच्छी तरह से मालूम है लेकिन जाने-अनजाने, चाहे-अनचाहे वे लोग सुनने पर न तो इतना ध्यान दे पाते हैं जितना की उन्हें देना चाहिये, और न ही समय और ऊर्जा उस पर लगा पाते हैं। शुरुआती कुछ महीनों में तो सीखनेवालों को सुनने पर ही सारा ध्यान केंद्रित करना चाहिये ताकि वे अंग्रेज़ी बोलते समय सही उच्चारण कर सकें। लेकिन यह एक बोरिंग एक्सरसाइज़ है, यानी बहुत उबाऊ और थकाऊ अभ्यास है और जो भी व्यक्ति इस एक्सरसाइज़ को कष्ट उठाकर कर लेता है वह अंग्रेज़ी में आगे चलकर एक चैंपियन बन जाता है, इस बात में कोई शक नहीं। आप एक बच्चे का ही उदाहरण ले लीजिए वह अपने जीवन के शुरुआत के कई महीनों तक केवल सुनता रहता है, सुनता रहता है, सुनता रहता है और एक दिन ऐसा आता है कि वह सुनते-सुनते बोलने लग जाता है; बस यही कहानी दोहराई जाती है जब आप एक दूसरी भाषा के रूप में अंग्रेज़ी को सीखते हैं।

अब मैं आपको एक और उदाहरण देना चाहूंगा और वह उदाहरण है एक चपरासी का। मैं एक स्कूल में टीचर्स ट्रेनिंग के लिए जाता था वहां पर एक दिलचस्प वाकया हुआ। एक चपरासी हमारे क्लासरूम में पानी लेकर आया।जब मैंने किसी अन्य टीचर से अंग्रेज़ी में पूछा कि क्या वह पानी मेरे साथ शेयर करेंगे ताकि उस चपरासी को बहुत दूर तक पानी लेने न जाना पड़े। यह सुनकर वह टीचर कुछ बोले उसके पहले वह चपरासी अंग्रेज़ी में बोल पड़ा: “नो प्रॉब्लम सर, आय केन फ़ेच मोर वॉटर, इटल बी माय प्लेज़र सर।“ ( कोई समस्या नहीं है श्रीमान, मैं और पानी ला सकता हूँ इसमें मुझे खुशी होगी।) मैं ही नहीं वहां के सारे शिक्षक उसे फ़र्राट अंग्रेज़ी बोलते देखकर दंग रह गए। पूछने पर उसने बताया कि वह कई साल तक सेना के एक अधिकारी के यहां पर काम करता रहा है और उसने अंग्रेज़ी सुन-सुन कर सीखी है जब मैंने उसकी शैक्षणिक योग्यता पूछी तो उसने बताया कि वह केवल अपना नाम मुश्किल से लिख पाता है और उसकी प्राथमिक शिक्षा भी पूरी नहीं हो पाई थी। तो दोस्तों यह है महत्व सुनने का और सुनकर बोलना सीखने का।

अब आपके लिए मेरी एक दोस्त जैसी सलाह है कि आप हर रोज़ अंग्रेज़ी में थोड़ा बहुत सुने, चाहे मोबाइल फोन पर या कंप्यूटर पर या फिर टी.वी. पर। और कुछ न हो तो रेडियो पर तो अंग्रेज़ी में समाचार वगैरह सुन ही सकते हैं। याद रखें ऐसा करने से आप अपने कानों को सुनने की ट्रेनिंग दे रहे होंगे और अपनी जुबान को बोलने के लिए तैयार कर रहे होंगे। मेरी इस नेक सलाह के अलावा ढेरों शुभकामनाएं आपके साथ हैं।







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