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विचार

कुछ ऐसे बोल सकते हैं आप धाराप्रवाह अंग्रेज़ी

दिनांक: 2014-11-19
लेखक: कैलाश चन्द्र शर्मा

अंग्रेज़ी के विषय में अनेक भ्रान्तियां प्रचलित हैं। और उन भ्रांतियों और भ्रमों के चलते लाख कोशिशों के बावजूद हम अंग्रेज़ी नहीं बोल पाते हैं। नीचे कुछ ठोस सुझाव दिए हैं जिन्हें अपनाकर हर मेहनती व्यक्ति अंग्रेज़ी धारा प्रवाह बोल सकता है। अपना करियर बनाने के लिए संजीदा विद्यार्थियों एवं उद्यमियों के लिए अंग्रेज़ी बोलचाल का महत्व बढ़ गया है। ऐसे में ये सुझाव आपको सहायता कर सकते हैं। अगर इन पर संकल्पपूर्वक अमल किया जाए।

अंग्रेज़ी को महिमामंडित (glorify) न करें- दुर्भाग्य से अंग्रेज़ी को बहुत कठिन व ऊँची भाषा के रूप में पेश किया जाता है। इससे व्यर्थ में डर लगने लगता है और जो डर गया सो मर गया की उक्ति चरितार्थ हो जाती है। अंग्रेज़ी तो हिंदी, मराठी एवं गुजराती जैसी ही एक भाषा है , जिसकी परंपराएं थोड़ी-बहुत अलग हैं। हर भाषा परम्पराओं का एक समूह है और अन्य परम्पराएं हमें अटपटी लग सकती हैं। अंग्रेज़ी भी हमें अटपटी लग सकती है किंतु थोड़ी सी प्रैक्टिस के बाद सामान्य लगने लगती है। अतः अंग्रेज़ी को सीखने का पहला सूत्र याद रखें : न चढ़ाओ सर पर, न रहो डर कर।

अंग्रेज़ी बोलना बोलने से ही आयेगा और सुनना सुनने से- सुनना बोलने से कई गुना अधिक कीमती है किंतु प्रायः सभी लोग सुनने कि उपेक्षा करते हैं। सुनना और ध्यानपूर्वक सुनना तथा सुनकर ठीक- ठीक समझना एक कला है जो सही मार्गदर्शन एवं समुचित अभ्यास से ही विकसित होती है। गलत उच्चारण सुनकर आप गलत बोलना ही सीखेंगे। शब्दों के गलत चयन देख – पढ़- सुन कर आप भी वैसे ही गलत प्रयोग करने लगेंगे। इसी प्रकार बोलना भी धीरे धीरे आता है। अतः पर्याप्त धैर्य रखें किंतु मेहनत में कसर न छोड़ें। धैर्य का मतलब आलसीपन नहीं होता। एक व्यक्ति तैराकी (swimming) पर ढेरों पुस्तकें पढ़ ले तब भी तैरना उसे नहीं आयेगा। यदि वह स्विमिंग पूल के चक्कर लगाता रहे यह सोचकर कि 'जब तैरना आयेगा तब पानी में पैर डालूँगा', उसे कभी भी तैरना नहीं आयेगा। अंग्रेज़ी में बोलना तभी संभव है जब आप बोलना शुरू करें, भूलें होने दें, उन्हें सुधारें और इस तरह आगे बढें। याद रहे कि पुस्तकें एवं पत्र-पत्रिकाएँ पढ़ने से भाषा ज्ञान बढ़ेगा किंतु बोलने का साहस नहीं होगा। बोलना, बोलने से आयेगा और सुनना, सुनने से आयेगा। सुनने कि उपेक्षा करने वाले बोलने कि अपेक्षा न करें।

प्रिंट मीडिया के साथ-साथ इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का दोहन कर अंग्रेज़ी सुधारें- अख़बार व पत्रिकाएँ पढ़ें, अवश्य पढ़ें, किंतु इतना काफी नहीं है। इस प्रकार की सामग्री पढ़ने से आपके स्पेलिंग्स सुधरेंगे, किंतु उच्चारण नहीं। अतः टीवी तथा रेडियो का सहारा लें। इस प्रकार के साधनों एवं मल्टीमीडिया के इस्तेमाल से आपको उच्चारण के साथ स्वरों के उतार-चढाव (intonation) और तनभाषा (body language) का भी ज्ञान होगा। सुनते समय डूब जायें, सुनने में खो जायें , अच्छे उद्घोषक अथवा साक्षात्कारदाता नेता, अभिनेता या अन्य लोगों के साथ बहने लगें, तन्मय हो जायें तभी आप उनके गुणों को ले पाएंगे और बोलने कि या संवाद कर पाने की कला का विकास हो पायेगा। हाँ एक बात और, ध्यानपूर्वक केवल उन्हें ही सुने, जिनकी स्वयं की अंग्रेज़ी अच्छी हो क्यों कि यहाँ आपका उद्देश्य अंग्रेज़ी सुधारना है, सीखना है। यही नियम हिंदी भाषा को सुधारने- संवारने पर भी लागू होता है।

आत्मविश्वास खरीदने के बजाये उसे पनपायें- आजकल कई जगह आत्मविश्वास बेचने के केंद्र खुल गए हैं। झूठे वादों और ऊँचे नारों के पीछे की सच्चाई समझें। आत्मविश्वास (self-confidence) कोई भी किसी को नहीं दे सकता। जैसे एक व्यक्ति किसी दूसरे व्यक्ति की हत्या तो कर सकता है परन्तु किसी दूसरे की आत्महत्या नहीं कर सकता। उसी प्रकार कोई भी आपको विश्वास तो दे सकता है पर आत्मविश्वास नहीं दे सकता। आत्म का अर्थ है स्वयं अतः आत्मविश्वास का अर्थ है खुद का खुद पर विश्वास। आप स्वयं सोचिएं कि इसे आपके अलावा कौन पनपा सकता है ? अच्छे गुरु, सच्चे प्रशिक्षक व सुलझे हुए मार्गदर्शक आपके लिए ऐसी परिस्थितियां अवश्य उत्पन्न कर सकते हैं जिनमें आपका आत्मविश्वास बढ़ें – आत्मविकास के द्वारा (self-improvement begets self-confidence ) किंतु वे आपको आत्मविश्वास बेचते या देते नहीं बल्कि आपको स्वयं लेने के लिए प्रेरित व तैयार करते है। ऐसे मार्गदर्शक तलाशें, तलाशने में समय दें , जल्दी न करें।

अच्छे अंग्रेज़ी भाषा संस्थान का चयन करें और उससे जुड़ें- कुछ विषय सैद्धान्तिक (theoretical) होते हैं और कुछ प्रायोगिक (practical) अंग्रेज़ी भाषा स्वयं किसी हद तक सैद्धान्तिक है किंतु बोलचाल की अंग्रेज़ी (Spoken English) तो पूरी तरह से प्रायोगिक है । तैराकी व पाककला आप सिर्फ पुस्तकों की सहायता से नहीं सीख सकते, उसी तरह अंग्रेज़ी में वार्तालाप भी आप केवल 'self study' से नहीं कर सकते, उसके लिए (person to person) रूबरू प्रशिक्षण आवश्यक है । अच्छा इंग्लिश लैंग्वेज़ इंस्टिट्यूट आपको सही मार्गदर्शन व प्रैक्टिस दे सकता है । याद रखें (seeing is believing) यानी देखना ही विश्वास करना है । यदि उनके पास सच्चा ज्ञान है व उनके काम में दम है, तो आपमें चंद दिनों के प्रशिक्षण से सकारात्मक परिवर्तन आएगा । और ऐसा परिवर्तन लाने वाला हर प्रशिक्षक सम्मान का अधिकारी है । सही मार्गदर्शक अधिक मायना रखता है । गोल-गोल चक्कर लगाने वाला भी मेहनत करता है परन्तु रास्ता तय करके मंजिल पर नहीं पहुंचता । आपको मंजिल मिले और आप अंग्रेज़ी बोलें, धाराप्रवाह बोलें, यही शुभकामना ।



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